रामगंगा की बाढ़ में डूबी किसानों की उम्मीद, मुआवजे से बड़ी नुकसान की मार

रामगंगा की बाढ़ में डूबी किसानों की उम्मीद, मुआवजे से बड़ी नुकसान की मार

धान समेत तिल्ली, बाजरा, उर्द व मूंग की फसलें चौपट, कर्ज लेकर खेती करने वाले किसानों के सामने आर्थिक संकट

प्रखरवाणी फर्रुखाबाद 

रामगंगा का पानी खेतों में पहुंचा तो किसानों की महीनों की मेहनत देखते ही देखते बर्बाद हो गई। वीरसिंहपुर, महोलिया, निगार, मोकलपुर, लभेदा, करनपुर दत्त, कोलासोता, बेचेपट्टी, भावन, हीरानगर, गुड़ेरा, अमैयापुर, खाखिन, रुलापुर समेत दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी उतरने के बाद फसल नुकसान की तस्वीर सामने आने लगी है। पकने की कगार पर पहुंच चुकी धान की फसल खेतों में बिछी है, जबकि तिल्ली, बाजरा, उर्द और मूंग की तैयार फसल भी पानी की चपेट में आकर खराब हो गई। किसानों के सामने अब फसल बर्बादी के साथ खेती पर लिया गया कर्ज चुकाने की चिंता भी खड़ी हो गई है।
कई दिनों तक खेतों में पानी भरा रहने से धान के पौधे जमीन पर गिर गए हैं। बालियों में दाना खराब होने और फसल सड़ने का खतरा बढ़ गया है। दूसरी फसलों की भी यही स्थिति है। किसानों का कहना है कि फसल तैयार होने तक बीज, खाद, जुताई, सिंचाई और मजदूरी पर काफी खर्च हो चुका था। कटाई से ठीक पहले बाढ़ आने से पूरी लागत डूब गई। अब खेतों में बची फसल को देखकर किसान नुकसान का अनुमान लगाने को मजबूर हैं।
वीरसिंहपुर क्षेत्र के किसान रामसागर, शिवसागर, अरुण कुमार सिंह, अनगपाल, सूबेदार और शैलेंद्र सिंह ने बताया कि इस बार फसल से अच्छी आमदनी की उम्मीद थी, लेकिन बाढ़ ने सारी गणित बिगाड़ दी। रामसागर, संतोष, राघवेंद्र, राजकुमार, परशुराम, चुन्नी और वीरेंद्र सिंह समेत अन्य किसानों ने भी फसल बर्बाद होने की जानकारी दी। किसानों का कहना है कि फसल क्षति का सर्वे कराया गया है, लेकिन अब निगाहें मिलने वाले मुआवजे पर टिकी हैं। उनकी मांग है कि सर्वे में खेत में हुए वास्तविक नुकसान को शामिल करते हुए उचित सहायता दी जाए, जिससे परिवार पर पड़े आर्थिक बोझ को कुछ कम किया जा सके।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि बाढ़ प्रभावित गांवों में फसल क्षति का दोबारा भी सत्यापन कराया जाए और पात्र किसानों को नियमानुसार पर्याप्त मुआवजा दिलाया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि कागजी सर्वे से ज्यादा जरूरी है कि खेत में हुए वास्तविक नुकसान का सही आकलन हो। साथ ही रामगंगा के बढ़ते जलस्तर से हर वर्ष होने वाली फसल बर्बादी को रोकने के लिए स्थायी इंतजाम किए जाएं, ताकि किसानों की मेहनत बार-बार बाढ़ की भेंट न चढ़े।

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