पांचाल घाट पर श्रमदान से गूंजा स्वच्छता का संदेश

पांचाल घाट पर श्रमदान से गूंजा स्वच्छता का संदेश

गांधी जयंती पर स्वच्छता ही सेवा और सेवा संकल्प अभियान के तहत चला सफाई अभियान


                      



प्रखरवाणी (फर्रुखाबाद)                                                                                                                                                       

गांधी जयंती पर गुरुवार को स्वच्छता ही सेवा और सेवा संकल्प अभियान के तहत पांचाल घाट पर गंगा तट की सफाई के लिए सामूहिक श्रमदान किया गया। सांसद मुकेश राजपूत के साथ मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार गौड़, जिला पंचायत राज अधिकारी अविनाश चंद्र, खंड विकास अधिकारी बढ़पुर योगेश पांडेय, सहायक विकास अधिकारी पंचायत और ग्राम पंचायत सोता बहादुरपुर के सचिव ने सफाई अभियान में हिस्सा लिया। अधिकारियों और कर्मचारियों ने घाट पर सफाई कर लोगों को सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ रखने का संदेश दिया।

मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार गौड़ और जिला पंचायत राज अधिकारी अविनाश चंद्र ने भी श्रमदान करते हुए सफाई व्यवस्था का जायजा लिया। पांचाल घाट के साथ जिले के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर सफाई अभियान चलाया गया। इस दौरान लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करते हुए कूड़ा इधर-उधर न फेंकने और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने के लिए प्रेरित किया गया। अभियान का उद्देश्य स्वच्छता को केवल आयोजन तक सीमित रखने के बजाय इसे रोजमर्रा की आदत बनाने का संदेश देना रहा।

सफाई के बाद पांचाल घाट स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इसके बाद विकास भवन सभागार में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित की गई। अधिकारियों ने दोनों महापुरुषों के देश की आजादी और राष्ट्र निर्माण में योगदान को याद किया। गांधीजी के स्वच्छता के संदेश को जनभागीदारी से जोड़ते हुए सार्वजनिक स्थलों की साफ-सफाई में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका पर जोर दिया गया।गंगा तट पर हुए श्रमदान के दौरान स्वच्छता के साथ घाटों की स्वच्छता बनाए रखने की जिम्मेदारी भी लोगों के बीच साझा करने का संदेश दिया गया। अभियान में प्रशासनिक अधिकारियों, पंचायत कर्मियों और स्थानीय स्तर के कर्मचारियों की सहभागिता रही। गांधी जयंती पर हुए इस आयोजन के जरिए साफ-सफाई को एक दिन के अभियान के बजाय निरंतर चलने वाली सामूहिक जिम्मेदारी बनाने पर जोर दिया गया।



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